Nepali adult sex live chat com

Posted by / 06-Mar-2019 03:45

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This website uses abode flash to display video and access the user’s webcam." "क्या" "प्लीज़ मम्मी, बस एक बार" "पर किसी को बताना मत" "बिल्कुल नहीं बताऊंगा" मैं मम्मी की हिप्स पे किस करने लगा और जीभ से चाटने भी लगा "बेटे कम्बल निकाल दे" मैंने कम्बल निकाल दिया "मम्मी आपकी हिप्स के सामने तो अमूल बटर भी बेकार है" "अच्छा" "मम्मी मैं एक बार आपकी धूनी(नाभि) पे किस करना चाहता हूं" "नहीं, तूने हिप्स पे कहा था और वो मैंने करने दिया और तूने तो उसे चाटा भी है, अब और नहीं" "प्लीज़ मम्मी, जब हिप्स पे कर लिया तो धूनी से क्या फ़र्क पड़ता है? " "मैं तो आपकी जांघों को भी चूमना चाहता हूं, आपकी जांघों की शेप किसी को भी ललचा सकती है, आपकी कच्छी(पैंटी) आपकी कमर पे इतनी अच्छी तरह फ़िट हो रही है के मैं बता नहीं सकता, आपकी जांघें देख कर तो मेरे मुँह में पानी आ रहा है, क्या मैं आपकी जांघों पे भी किस कर सकता हूं? " "हम्मम्मम...निकाल दे" अब मम्मी बिना शलवार के थी। फिर मैं मम्मी की धूनी को चाटने लगा। मम्मी ने अपनी आंखें बंद कर ली। फिर मैं मम्मी की जांघों को दबाने, चूमने और चाटने लगा।फिर मैने एक चुम्मा पैंटी के ऊपर से ही मम्मी की चूत का लिया "अह्हह, बेता, ऊउस्सस्सशह्हह्हह्हह..यह क्या..अच्छा लग रहा है" "मम्मी मैं आपकी चूत चखना चाहता हूं" "क्या चखना चाहता है? " "नहीं, कच्छी निकाल दे" मम्मी के इतना कहने की देर थी कि मैंने कच्छी निकाल दी और मम्मी की चूत को चाटना शुरु कर दिया। मम्मी सिसकने लगी "ईईएस्सशह्हह्हह्ह...आआआह्हह्हह..बेटा। बहुत आनन्द आ रहा है। मेरी चूत पे तेरी जीभका स्पर्श कमाल का मज़ा दे रहा है" मैं कुछ देर तक मम्मी की चूत चाटता रहा। इतने सब होने के बाद तो मेरा लौड़ा भी तैयार था "मम्मी अब मेरा लौड़ा बेचैन हो रहा है" "लौड़ा क्या होता है" मैंने अपना पैंट उतार कर अपना लौड़ा मम्मी के सामने रख दिया और बोला "मम्मी इसे कहते हैं लौड़ा" "हाय माँ..तू इतना गंदा कब से बन गया कि अपना यह..क्या नाम बताया तूने इसका" "लौड़ा" "हां, लौड़ा, की अपना लौड़ा अपनी ही माँ के सामने रख दे" "माँ मेरा लौड़ा मेरी माँ की चूत के लिये मचल रहा है" "लेकिन बेटे माँ की चूत में उसके अपने बेटे का लौड़ा नहीं घुस सकता" "लेकिन क्यों माँ? " "मैं तेरी मा हूं" "मेरी माँ होने से पहले तू क्या है" "इंसान" "और उसके बाद?" "पता नहीं तूने मुझ में ऐसा क्या देख लिया है, हम दोनो जो भी करेंगे सिर्फ़ आज करेंगे और आज के बाद कभी इसको डिस्कस भी नहीं करेंगे, प्रोमिस? " "एक औरत" "बस, सबसे पहले तू एक औरत है और मैं एक मर्द, और एक मर्द का लौड़ा औरत की चूत में नहीं घुसेगा तो कहां घुसेगा" "लेकिन...." "क्या माँ, जब मैंने तेरी चूत तक चाट ली तो क्या तुझे चोद नहीं सकता" "चोद मतलब?" "मतलब अपना लौड़ा तेरी चूत में" "तू मेरी चूत चाहे कितनी ही चाट ले, मुझे चटवाने में ही मज़ा आ रहा है" "माँ चुदाई में जो आनंद है वो और किसी चीज़ में नहीं" "तू जानता नहीं मेरी चूत इस वक्त लौड़े की भूखी है। पर कहीं बच्चा न हो जाये" "नहीं माँ, मैं अपना माल तेरी चूत में नहीं गिराऊंगा" "प्रोमिस" "प्रोमिस" "तो अपनी माँ की बेकरार चूत को ठंडा कर दे न, बेटे मेरी चूत की आग बुझा दे न" "पहले तू बैठ जा" "ले बैठ गयी" "अब तु मेरे लौड़े पे बैठ जा" फिर माँ मेरे लौड़े पर बैथ गयी और मैंने धक्के मारने शुरु कर दिये "ऊऊऊऊओ...बेटे .....अह्हह्हह्हह्हह" "ओह, ओह, मा तेरी चूत तो टाइट है" "ऊऊऊओह्हह्हह्हह....अपने बेटे जे लिये ही रखी है" "हां..माँ की चूत बेटे के काम नहीं आयेगी तो किसके काम आयेगी" "ऊऊऊओ...मेरा प्यारा बेटा..मेरा अच्छा बेटा..और ज़ोर लगा" "ऊह्ह....मेरी माँ कितनी अच्चही है" फिर मैं और मम्मी चुदाई के साथ फ़्रेंच किस भी करते रहे "ऊऊऊऊ माँ मेरा माल निकलने वाला है" "मेरा भी" "करूं अपने लौड़े को तेरी चूत से अलग?

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हाय, मेरा नाम सुमित है। मुझे अभी तक यकीन नहीं होता जो मैं लिखने जा रहा हूं। ३ दिन पहले मेरे साथ ऐसा एक्सपेरिएंस हुआ जो मैं सोच भी नहीं सकता था। हुआ यूं कि मेरी पूरी फ़ेमिली (मेरा संयुक्त परिवार है) किसी शादी पे दो दिन के लिये चली गयी। घर सिर्फ़ पापा, मम्मी और मैं था। सुबह पापा भी ओफ़िस चले गये। मम्मी कामवाली के साथ काम करने लगी और मैं अपने कमरे मैं स्टडी करने चला गया। करीबन दपहर एक बजे कामवाली चली गयी। मैं स्टडी कर रहा था के मुझे मम्मी की आवाज़ अयी। मैं कमरे के बाहर गया तो देखा कि मम्मी फ़र्श पर गिरी पड़ी थी। मैने फ़ौरन जाकर मम्मी को उठाया और पूछा "क्या हुआ" "फ़र्श पर पानी पड़ा था, मैने देखा नहीं और गिर गयी" "चोट तो नहीं लगी" "टांग मुड़ गयी" "हल्दी वाला दूध पी लो" "नहीं, उसकी ज़रूरत नहीं। बस टांग में दर्द हो रहा है, लगता है नश पे नश चढ़ गयी है" "थोड़ी देर लेट जाओ" "मुझसे चला नहीं जा रहा, मुझे बस मेरे कमरे तक छोड़ आ" "आराम से लेट जाओ और अब कोई काम करने की ज़रूरत नहीं है" "हाय रे, टांग हिलाई भी नहीं जा रही" "मैं कुछ देर दबा दूं क्या" "दबा दे" मैने टांग दबानी शुरू की। मैं पूरी टांग दबा रहा था, पैर से लेकर जांघ तक "कुछ आराम मिल रहा है?